आज अयोध्या में नया भोर है, नए भोर का यह समारोह है। हर...
कविता
जीवन की धमनियों में बहते प्रवाह को ही कविता कहते हैं।
कितने झंझावात आते, सबको उसने झेला था। जितने बाधा, कंटक आते, सबसे उसने खेला...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...
कुरुक्षेत्र: अंतर्द्वंद्व का महासमर गांधारी गम के सागर में डूबी, अपने ममता के...
UBI Contest – 110 सृजन का संगम ईंट और पत्थरों के भीतर, एक...
अंतर्द्वंद्व की परछाइयाँ मेरा लक्ष्य क्या पैसा है? मुझे पता नहीं! मेरा...
रास्ते और राही: जीवन की यात्रा और दार्शनिक अंतर्द्वंद्व पर एक मर्मस्पर्शी कविता | अश्विनी राय ‘अरुण’
रास्ते और राही जहाँ से मैं आ रहा हूँ, वहाँ वापस जाना नहीं...
उम्र से मुलाकात मैंने कहा—जाती हुई उम्र से, ‘जरा ठहरो तो सही!’ उसने...
कभी बचपन के पास से गुज़रकर तो देखो, बचपना आ जाएगा। कभी पचपन...
#UBI_contest_111 आम का अचार आम का अचार बनाते हैं, आओ खाते हैं, खिलाते...