आंखो से बहते स्याही को जज़्बात की कलम में ढाल कर अपने धड़कन की...
कविता
जीवन की धमनियों में बहते प्रवाह को ही कविता कहते हैं।
एक दिन मेरी गांधी से भेंट हो गई चीरपरीचीत भाव से यूं ही मुस्कुरा...
नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है कुछ तो होने वाला है...
जमाने के रंग जब जब बदले, तुम भी यूं ही बदल गए। जवानी...
आओ कुछ बात करें अपने जहान की, हाँथ ही बात करेंगे दबे बेज़ुबान...
जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े राहों से, एक शाम गुजरती है। उस शाम से सुबहा के...
जीवन चलने का नाम है, इसमें कितने विचार पल रहे हैं। वे विचार...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...
निगाहें और वफ़ा उनकी हिकारत को हम सहते रहे, मगर लब सदा ख़ामोश...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...