अमिट स्मृतियाँ अलविदा कह कर भला, क्या चले जाते हैं लोग? मैंने तो...
कविता
जीवन की धमनियों में बहते प्रवाह को ही कविता कहते हैं।
वक्त का हिसाब कुछ लम्हे अपनी ही ज़िंदगी के, मैंने ज़िंदगी से चुरा...
मिट्टी की खुशबू: एक जीवन दर्शन ये मिट्टी है, हाँ जी ये मिट्टी...
घर: कर्मों की बुनियाद इक आलीशान घर की ख़ातिर मैंने, न जाने कितनों...
तुम्हारी आँखें लबों पर हर बार खामोशी झूलती है, मगर हर बात कहती...
विश्व कविता दिवस: हृदय की अनुभूतियों का भाषाई उत्सव कहते हैं कि जहाँ...
एक शाम चौराहे पर दीया जल रहा था कभी मद्धम तो कभी भभक रहा...
तलाशते अवसर कितने बोझिल थे, वे प्रतीक्षा के क्षण, तुम्हारे इंतज़ार में। मेरे...
विषय : दृष्टि दिनाँक : ०६/११/१९ मैंने देखा है…मैंने देखा है, राम को...
विषय : दीवार दिनाँक : ०६/०१/२०२० नफरत की दीवार मैंने जितनी बार तोड़ना चाहा...