April 22, 2024

खान लॉबी (खांस) ने पूरी फिल्म इंडस्ट्रीज को अपने बाप की जागीर समझ रखी है। उन्हें भारतीयों से कहीं ज्यादा पसंद पाकिस्तान के कलाकार लगते हैं। इसके लिए उन्होने पूरी की पूरी एक लॉबी बना रखी है। अगर उन्हें कभी जरूरत पड़ी भारतीय कलाकारो को तो प्रथमतः वे मुस्लिम कलाकारो को अहमियत देंगे फिर अपने हिंदू चमचो को और तत्पश्चात उन कलाकारो को जिनसे उन्हें एग्रीमेंट के तहत मोटी आर्थिक लाभ मिल सके। तकरीबन इसी क्रम में कलाकारो, निर्देशक, गायक, गीतकार आदि का चयन होता है, थोड़ी बहुत अपनी सुविधा और लाभ के साथ बदलाव करके।

अब आते हैं उदाहरणों पर…

सन्नी देओल, बॉबी देओल और उनके परिवार को ही लीजिए… उनका करियर गदर और अपने के बाद मानो ख़तम ही हो गया है अथवा कर दिया गया है।इतनी अच्छी मूवी थीं ये मगर कोई अवॉर्ड नहीं मिला उन्हें।

नील नितिन मुकेश को उनकी छोटी सी कहा सुनी की वजह से गैंग ने करियर ख़तम कर दिया।

सोनू निगम जी को ही लें, जो एक जाने माने अच्छे गायक थे। अब सिर्फ पार्टियो और शोज में ही नजर आते हैं। धार्मिक होने की वजह से उनको इंडस्ट्री से गायब कर दिया गया।

विवेक ओबेरॉय को सलमान गैंग ने किनारे लगा दिया।

पूरी खान लॉबी आज भी अरजीत सिंह के पीछे पड़ी है। कहीं वो भी सुशांत की तरह ???

ऋतिक रोशन के पीछे भी वे पड़े हैं मगर… आज वे सिर्फ अपने पिता की प्रोडक्शन हाउस की वजह से बचे हैं।

अजय देवगन, कंगना जैसे जाने कितने हिन्दू विचार धारा के सेलिब्रिटी हैं जो सिर्फ अपने प्रोडकशन हाउस की वजह से टिके हुए हैं वरना कबके गायब हो चुके होते। और जाने कितने ऐसे हैं अथवा होंगे जो सच में ख़त्म किए जा चुके हैं। आधे से अधिक को तो आदमखोर सलमान खान स्वयं खा गया होगा। जिससे जब रनबीर कपूर जैसा कलाकार तक नहीं बच पाया बाकियों की क्या औकात।

सही मायनो में कहिए तो यहां सिर्फ अमिताभ जैसे हिन्दू चल सकते है जो अपने केबीसी शो में बुर्का को छोड़कर राजस्थानी महिला की घुघट प्रथा का जोरदार विरोध करते है।

शर्मनाक इंडस्ट्री…

अवॉर्ड फंक्शंस में स्वयं को बड़ा दिखाने के लिए नवोदित को नीचा दिखाना,यह कितना गलत तरीका है। आज तक मुझे तो दूसरों की खिल्ली उड़ाने वाला कॉन्सेप्ट ही कभी समझ नहीं आया और वो भी इंटरटेनमेंट के नाम पर। अब देखिए ना दो तथाकथित सुपर स्टार सुशांत का मजाक उड़ा रहे हैं एक अवार्ड्स फंक्शन में उनमें से एक दिलीप कुमार साब की तो कभी अमिताभ की नकल करता है, दूसरे की पहचान तो सिर्फ इतना है की वह मजे हुए एवं प्रतिष्ठित कलाकार पंकज कपूर का बेटा और करीना कपूर द्वारा रिजेक्ट किए गए पूर्व प्रेमी की हैसियत और पहचान रखता है। हां इन दोनो की खासियत इतनी जरूर है की इनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग बड़ी बेहतरीन ढंग से हुई है।

सलमान खान की पहचान सिनेमा जगत में शुरुवाती समय के ‘उई माँ से उठकर भाई (गुंडा)’ बनने की है। परिचय की अगर बात करें तो, ऋषि कपूर को बेइज्जत करना, महान शोमैन सुभाष घई को थप्पड़ मारना, रणबीर कपूर को पीटना, ऐश्वर्या राय का जीना दुशवार कर देना, कटरीना कैफ को अपने ही कार्यक्रम में ये कहना की ‘और कितना नीचे गिरोगी’, विवेक ओबरोय के करियर को बर्बाद कर देना, नवोदित गायक अरिजित सिंह को अवार्ड देते वक्त फटकारना और उनके गाए गीतों को रिलीज होने से रोकना, मलाइका अरोड़ा के काम में दखल देना, जबरन दूसरे कलाकारों के फिल्म सेट पर पहुँच कर तोड़ फोड़ करना और जब इन सब से समय बच जाए तो खाली समय में हिरणों के साथ ही साथ फूटपाथ पर सोए हुए मजदूरो का शिकार खेलना। यह सब तो उसके लिए आम बात है क्यूंकि इसके लिए भी उसने अंगरक्षक भी खासे खूंखार पाले हुए हैं; जिनमे से मुख्य अंगरक्षक शेरा किसी नरभक्षी की तरह लोगों के साथ व्यवहार करता है। उसका परिचय यह है की वह अंडर्वर्ल्ड से भी नाता रखता है, दाउद के दुबई वाले कोठे पर इसका आना जाना लगा रहा है।

अब देखिए ना सुशांत सिंह के केस में भी सलमान का नाम आ रहा है। अब ऐसे गुंडे को कोई भी सभ्य इंसान कैसे अपना हीरो बना सकता है ?? समस्या सलमान में नहीं समाज में है। हमारे समाज में सलमान जैसों को डर और सम्मान की नजर से जो देखा जाता है।

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1 thought on “भारतीय सिनेमा पर लॉबी का कब्जा

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